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कहो तो तुम्हारे वचन भूल जाऊँ

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कहो तो तुम्हारे वचन भूल जाऊँ भटकता हुआ मन अटक सा गया है, कहो तो तुम्हारे वचन भूल जाऊँ ? यहाँ दूर तक फूल ही फूल बिखरे, यहाँ रातरानी अकेली खड़ी है, यहाँ खुशबुओं के हिमालय गड़े हैं, यहाँ की हवा में चमेली पड़ी है.. कली एक अठखेलियाँ कर रही है, कहो तो तुम्हारी छुअन भूल जाऊँ ?   यहाँ लोग तो खूबसूरत बहुत हैं, मगर क्या करूँ एक मेरा नहीं है, यहाँ चाँदनी साथ में रोज सोती, यहाँ दूर तक भी अँधेरा नहीं हैं...   यहाँ से सितारे बहुत पास दिखते, कहो तो तुम्हारे नयन भूल जाऊँ?

शोर करती हैं लहरें

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शोर करती हैं लहरें शोर करती हैं लहरें किनारों पर रातभर..  शोर सुनती हैं रातें फिर भी चुपचाप हैं.. बिखर जाते हैं कभी कभी किसी बात पर ...  मैंने कई बार फिर से समेटे मेरे ख़यालात हैं.. ज़मीन पर रुक नहीं पाते हैं कुछ देर तक फिर भी ...  हमें लगता है कि आसमाँ के परिंदे आज़ाद हैं ... वो जो तुझसे कहती है कि तू बहुत कुछ है ...  वो कोई और नहीं तेरे ही मन की आवाज़ है.. तो क्या हुआ जो फासले हो गए हमारे दरमियां...  मैं रहती हूँ जहां भी वो दिल में मेरे साथ है ... ज़माने से कहते फिरते हो कि सब खुशनुमा है...  क्यूँ अपने दिल में तुमने दबाए इतने जज़्बात है... शोर करती हैं लहरें किनारों पर रातभर ...  शोर सुनती हैं रातें फिर भी चुपचाप हैं..

मैं और मेरे अल्फाज

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  मैं और मेरे अल्फाज लिखें जाते हैं  कुछ अनकहे अल्फाज  जिसमें होतें है,  सबसे खूबसूरत अहसास। जो न बताए जाते हैं  न जताये जाते हैं  बस,  एकांत फुर्सत के पल में,  किसी कागज पर  उकेरे जातें हैं  कुछ दर्द  गम  खुशियों को,  सूकून के कलम से  अनकहे अल्फाज,  बड़ी शिद्दत से,  संवारे, संभाले जातें हैं..

अनजाने रिश्ते..

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अनजाने रिश्ते .. कभी खामोश  तो कभी  चुपचाप मुस्कुराते कभी अजनबी  तो कभी दिल के करीब लगते न कोई बंधन  न कोई अपेक्षा  नि:स्वार्थ समर्पित  कुछ अनकहे एहसास  कुछ खामोश जज़्बात  एक रुहानी अनुभूति  एक मासूम अभिव्यक्ति  एक आत्मीय सहेजते से अनजाने रिश्ते..

माना इक कमी सी है

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माना इक कमी सी है जो छूट गया उसका क्या मलाल करें, जो हासिल है,चल उस से ही सवाल करें !! बहुत दूर तक जाते है, याँदों के क़ाफ़िले, फिर क्यों पुरानी याँदो में सुबह से शाम करें । माना इक कमी सी है, जिंदगी थमीं सी हैं, पर क्यों दिल की धड़कनों को दर-किनार करें!! मिल ही जाएगा जीने का कोई नया बहाना, आ ज़रा इत्मीनान से किसी ख़ास का इंतज़ार करें !!

मेरी तरसी हुई आंखों के सूखे आंसू

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   मेरी तरसी हुई आंखों के सूखे आंसू मेरी तरसी हुई आंखों के सूखे आंसू  वक्त वे वक्त तेरे नाम पे रो जाते क्यूं हैं... जब भी सीने से सिसक उठते हैं गुजरे लम्हें  मेरे सब ख्वाब तेरी याद में खो जाते क्यूं हैं ... तू मेरा कुछ भी नहीं है तो फिर तेरी चाहत को मेरा प्यार बुलाता क्यूं है... मुझे भूलने वाले ये बता दे मुझको  अब भी हर पल तू मुझे याद आता क्यूं है... मैं भूल जाना चाहती हूं तुझे वो तेरी हर बात को जो नासूर बन चुके हैं मेरे सीने में जिसका मुझसे कोई वासता न रह गया उस शख्स को ये दिल भूल जाता क्यूं नहीं है...

क्या लिखूं...

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   क्या लिखूं ... क्या लिखूं... वो साथ गुजारे पल लिखूं या मैं बीते साल लिखूं  सदियों लंबी रात लिखूं.. मैं तुमको अपने पास लिखूं  या दूरी का एहसास लिखूं.. दिल का दर्द लिखूं या चेहरे की मुस्कान लिखूं  वो बरसात के अमरूद लिखूं  या जेठ के दोपहरी की चाय लिखूं.. स्कूटी पर साथ होने का एहसास लिखूं  या ट्रेन की वो आखिरी मुलाकात लिखूँ वो साथ गुजारे लम्हें लिखूं या कभी न खत्म होने वाला  इंतजार लिखूं..