माना इक कमी सी है

माना इक कमी सी है

Rupa Oos ki ek Boond

जो छूट गया उसका क्या मलाल करें,

जो हासिल है,चल उस से ही सवाल करें !!


बहुत दूर तक जाते है, याँदों के क़ाफ़िले,

फिर क्यों पुरानी याँदो में सुबह से शाम करें ।


माना इक कमी सी है, जिंदगी थमीं सी हैं,

पर क्यों दिल की धड़कनों को दर-किनार करें!!


मिल ही जाएगा जीने का कोई नया बहाना,

आ ज़रा इत्मीनान से किसी ख़ास का इंतज़ार करें !!


Comments

  1. अब हर कमी तो पूरी हो नहीं सकती, बढ़ना पड़ेगा ही.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

प्रेम ब्रह्मांड जितना विशाल है

कहो तो तुम्हारे वचन भूल जाऊँ

अनजाने रिश्ते..