शोर करती हैं लहरें

शोर करती हैं लहरें

Rupa Oos ki ek Boond

शोर करती हैं लहरें किनारों पर रातभर.. 

शोर सुनती हैं रातें फिर भी चुपचाप हैं..


बिखर जाते हैं कभी कभी किसी बात पर ... 

मैंने कई बार फिर से समेटे मेरे ख़यालात हैं..


ज़मीन पर रुक नहीं पाते हैं कुछ देर तक फिर भी ... 

हमें लगता है कि आसमाँ के परिंदे आज़ाद हैं ...


वो जो तुझसे कहती है कि तू बहुत कुछ है ... 

वो कोई और नहीं तेरे ही मन की आवाज़ है..


तो क्या हुआ जो फासले हो गए हमारे दरमियां...

 मैं रहती हूँ जहां भी वो दिल में मेरे साथ है ...


ज़माने से कहते फिरते हो कि सब खुशनुमा है... 

क्यूँ अपने दिल में तुमने दबाए इतने जज़्बात है...


शोर करती हैं लहरें किनारों पर रातभर ... 

शोर सुनती हैं रातें फिर भी चुपचाप हैं..

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