मेरी तरसी हुई आंखों के सूखे आंसू
मेरी तरसी हुई आंखों के सूखे आंसू
मेरी तरसी हुई आंखों के सूखे आंसू
वक्त वे वक्त तेरे नाम पे रो जाते क्यूं हैं...
जब भी सीने से सिसक उठते हैं गुजरे लम्हें
मेरे सब ख्वाब तेरी याद में खो जाते क्यूं हैं ...
तू मेरा कुछ भी नहीं है तो फिर
तेरी चाहत को मेरा प्यार बुलाता क्यूं है...
मुझे भूलने वाले ये बता दे मुझको
अब भी हर पल तू मुझे याद आता क्यूं है...
मैं भूल जाना चाहती हूं तुझे
वो तेरी हर बात को
जो नासूर बन चुके हैं मेरे सीने में
जिसका मुझसे कोई वासता न रह गया
उस शख्स को ये दिल भूल जाता क्यूं नहीं है...

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