यादों का सिलसिला
यादों का सिलसिला
यादों का सिलसिला यू हीं अनवरत चलता रहता
कभी उसकी यादें स्कूटी पर भी रुला जाती
कभी चाय की प्याली के साथ हंसा जाती
कभी भरी महफिल में तन्हा कर जाती
तो कभी तन्हाई में गुदगुदा जाती
यादों का ये सिलसिला बदस्तूर चलता रहता
कभी पीछे से उसके बाहों के घेरे होते
और मैं जोर से चिल्ला जाती
कभी आलू टमाटर की सब्जी भी रुला जाती
कभी एक दूध की ग्लास भी हंसा जाती
यादों का ये सिलसिला बदस्तूर चलता रहता पर
ये यादें गुदगुदाती कम रुला ज्यादा जाती..❤️
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