कहो तो तुम्हारे वचन भूल जाऊँ
कहो तो तुम्हारे वचन भूल जाऊँ
भटकता हुआ मन अटक सा गया है,
कहो तो तुम्हारे वचन भूल जाऊँ ?
यहाँ दूर तक फूल ही फूल बिखरे,
यहाँ रातरानी अकेली खड़ी है,
यहाँ खुशबुओं के हिमालय गड़े हैं,
यहाँ की हवा में चमेली पड़ी है..
कली एक अठखेलियाँ कर रही है,
कहो तो तुम्हारी छुअन भूल जाऊँ ?
यहाँ लोग तो खूबसूरत बहुत हैं,
मगर क्या करूँ एक मेरा नहीं है,
यहाँ चाँदनी साथ में रोज सोती,
यहाँ दूर तक भी अँधेरा नहीं हैं...
यहाँ से सितारे बहुत पास दिखते,
कहो तो तुम्हारे नयन भूल जाऊँ?

सुंदर सृजन
ReplyDeleteक्या बात है ... बहुत सुन्दर सृजन ...
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