ख़्वाहिशें
ख़्वाहिशें
कुछ दबी हुई ख़्वाहिशें है,
कुछ मंद मुस्कुराहटें..
कुछ खोए हुए सपने है,
कुछ अनसुनी आहटें..
कुछ सुकून भरी यादें हैं,
कुछ दर्द भरे लम्हात..
कुछ थमें हुए तूफ़ाँ हैं,
कुछ मद्धम सी बरसात..
कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ हैं,
कुछ नासमझ इशारे..
कुछ ऐसे मंझधार हैं,
जिनके मिलते नहीं किनारे..
बहुत उलझनें है राहों में..
कुछ अनकही सी बात,
कुछ खामोशियों को चीरती आवाज..
कुछ आंसू पलकों पे,
कुछ जज्बात दफन हैं सीने में..
कुछ जलते हुए से अंगारे हैं,
कुछ शीतल मन्द बयार..
कुछ जागती आंखों के सपने हैं,
कुछ दिल में धधकते अरमां..
कुछ इन कदमों की आहटें हैं,
कुछ अनसुलझे से सवालात..
जिसका नहीं कोई जवाब ..
एक बेगानी सी डगर है,
जिसकी नहीं कोई मंजिल..
बहुत उलझनें हैं राहों में..

Comments
Post a Comment