आज रात भी तेरे खयालों से
आज रात भी तेरे खयालों से..
आज रात भी तेरे खयालों से,
निजात हम नहीं पाएंगे...
आज रात भी तुझे ढूंढने,
ख्वाबों में... हम फिर सो जाएंगे...
ले आएंगे तुमको करीब फिर खयाल से,
ख्वाब खो ना जाये, फिर से नींद टूटने के सितम से..
फिर सारी रात तकिये को भिगो देंगे,
तुझे खो देने के मातम से हम बचते बचते आज फिर रो देंगे..

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