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Showing posts from September, 2024

कहो तो तुम्हारे वचन भूल जाऊँ

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कहो तो तुम्हारे वचन भूल जाऊँ भटकता हुआ मन अटक सा गया है, कहो तो तुम्हारे वचन भूल जाऊँ ? यहाँ दूर तक फूल ही फूल बिखरे, यहाँ रातरानी अकेली खड़ी है, यहाँ खुशबुओं के हिमालय गड़े हैं, यहाँ की हवा में चमेली पड़ी है.. कली एक अठखेलियाँ कर रही है, कहो तो तुम्हारी छुअन भूल जाऊँ ?   यहाँ लोग तो खूबसूरत बहुत हैं, मगर क्या करूँ एक मेरा नहीं है, यहाँ चाँदनी साथ में रोज सोती, यहाँ दूर तक भी अँधेरा नहीं हैं...   यहाँ से सितारे बहुत पास दिखते, कहो तो तुम्हारे नयन भूल जाऊँ?

शोर करती हैं लहरें

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शोर करती हैं लहरें शोर करती हैं लहरें किनारों पर रातभर..  शोर सुनती हैं रातें फिर भी चुपचाप हैं.. बिखर जाते हैं कभी कभी किसी बात पर ...  मैंने कई बार फिर से समेटे मेरे ख़यालात हैं.. ज़मीन पर रुक नहीं पाते हैं कुछ देर तक फिर भी ...  हमें लगता है कि आसमाँ के परिंदे आज़ाद हैं ... वो जो तुझसे कहती है कि तू बहुत कुछ है ...  वो कोई और नहीं तेरे ही मन की आवाज़ है.. तो क्या हुआ जो फासले हो गए हमारे दरमियां...  मैं रहती हूँ जहां भी वो दिल में मेरे साथ है ... ज़माने से कहते फिरते हो कि सब खुशनुमा है...  क्यूँ अपने दिल में तुमने दबाए इतने जज़्बात है... शोर करती हैं लहरें किनारों पर रातभर ...  शोर सुनती हैं रातें फिर भी चुपचाप हैं..

मैं और मेरे अल्फाज

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  मैं और मेरे अल्फाज लिखें जाते हैं  कुछ अनकहे अल्फाज  जिसमें होतें है,  सबसे खूबसूरत अहसास। जो न बताए जाते हैं  न जताये जाते हैं  बस,  एकांत फुर्सत के पल में,  किसी कागज पर  उकेरे जातें हैं  कुछ दर्द  गम  खुशियों को,  सूकून के कलम से  अनकहे अल्फाज,  बड़ी शिद्दत से,  संवारे, संभाले जातें हैं..