इंतजार तो नहीं
इंतजार तो नहीं
उसे देखे इक अरसा हो गया
जिसे देखे बगैर चैन न था
इन आंखों को आज भी
उसके दीदार की चाह है
जिसको छोड़ कर गए
बरसों हो गया
चाहा बहुत की
दूरी बना लूं उससे
पर इस दिल का क्या करूं
जो आज भी उसी के लिए धड़कता है
कभी जो कहते थे
तेरा दिल मेरे सीने में धड़कता है
उनको सीने से दिल निकाले भी
इक मुद्दत हो गया
कभी जिसके हर पल की खबर थी
आज उसका हाल जाने भी
इस जमाना हो गया
कभी जो मुझे बिन सुलाए सोते नहीं थे
आज उन्हें मेरी नींद उड़ाए भी
बरसों हो गए
दुख तो इस बात से है
इन बीते बरसों में
इक बार पलटकर पूछा भी नहीं
जिन आंखों को सपने दिखाए थे
वो रोते तो नहीं
जो दिल लौटाया था
वो संभाला तो है
जो आदत लगाई थी
सुलाने की, वो छूटी के नहीं
कहीं आज भी
' सो जाओ ' का इंतजार तो नहीं
बड़ी शिद्दत से संवारा था जिस दिल को
उस दिल को मेरा इंतजार तो नहीं
चलो छोड़ो
इक बार पलटकर खैरियत तो पूछा होता
जिसे चाहा था कभी टूट कर
क्या वो जिंदा है, मरी तो नहीं..

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