ये हर बदलता मौसम
ये हर बदलता मौसम मुझे
ये हर बदलता मौसम मुझे
बेहद करीब ले जाता उसकी यादों के
मैं जितना दूर होना चाहती
वह उतना पास आते जाता
मैं भूलना चाहती जिन लम्हों को
वो कुछ ज्यादा ही याद आती
लम्हा लम्हा तो जुड़ा है उसकी बातों से
चाहे फिर वो सुबह की पहली किरण हो
दोपहर की चिलचिलाती धूप
शाम का दिलकश नज़ारा हो
या रात की शीतलता
बारिश की फुहारें हो
या आसमान में कड़कती बिजली
आधा चांद हो या
पुर्णिमा का पूरा चांद
पतझड़ हो या सावन
ये हर बदलता मौसम
बेहद करीब ले जाता उसकी यादों के
मैं जितना दूर होना चाहती
वह उतना पास आते जाता..💔
मैं जितना दूर होना चाहती
वह उतना पास आते जाता
मैं भूलना चाहती जिन लम्हों को
वो कुछ ज्यादा ही याद आती
लम्हा लम्हा तो जुड़ा है उसकी बातों से
चाहे फिर वो सुबह की पहली किरण हो
दोपहर की चिलचिलाती धूप
शाम का दिलकश नज़ारा हो
या रात की शीतलता
बारिश की फुहारें हो
या आसमान में कड़कती बिजली
आधा चांद हो या
पुर्णिमा का पूरा चांद
पतझड़ हो या सावन
ये हर बदलता मौसम
बेहद करीब ले जाता उसकी यादों के
मैं जितना दूर होना चाहती
वह उतना पास आते जाता..💔

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