ये हर बदलता मौसम

ये हर बदलता मौसम मुझे

दर्द शायरी / Dard Shayari
ये हर बदलता मौसम मुझे 
बेहद करीब ले जाता उसकी यादों के
मैं जितना दूर होना चाहती
वह उतना पास आते जाता
मैं भूलना चाहती जिन लम्हों को
वो कुछ ज्यादा ही याद आती
लम्हा लम्हा तो जुड़ा है उसकी बातों से
चाहे फिर वो सुबह की पहली किरण हो
दोपहर की चिलचिलाती धूप
शाम का दिलकश नज़ारा हो
या रात की शीतलता
बारिश की फुहारें हो
या आसमान में कड़कती बिजली
आधा चांद हो या
पुर्णिमा का पूरा चांद
पतझड़ हो या सावन
ये हर बदलता मौसम
बेहद करीब ले जाता उसकी यादों के
मैं जितना दूर होना चाहती
वह उतना पास आते जाता..💔

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