सम्पूर्ण प्रेम क्या है
सम्पूर्ण प्रेम क्या है
बिना छुए स्पर्श कर लेना
बिना शब्दों के बातें कर लेना
बिना मिले मन के भाव पढ़ लेना
बिना देखे महसूस कर लेना
बिना मिले साथी को जान लेना
बिना जाने भरोसा कर लेना
बिना चाहे एक दूजे के हो जाना
बिना समझे साथी पर खुद को
न्योछावर कर देना
बिना समझे अपनी दुनिया मान लेना
बिना सोचे खुद में साथी को उतार लेना
बिना मतलब के हर पल चाहना
बिना बात के साथी का इंतजार करना
बिना मोल भाव के खुद को समर्पित कर देना
बिना मिले बिना देखे किसी का हो जाना
यही तो निश्छल प्रेम है..❤️

बहुत मुश्किल है प्रेम को कह पाना ... अपनी अपनी परिभाषा है सब की ...
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