रात भर जगती अखियाँ
रात भर जगती अखियाँ
रात भर जगती अखियाँ,
राह उसकी तकती अखियाँ,
आंसुओं का बाँध है इनमें,
रो नहीं सकती अखियाँ।
मुमकिन नहीं अब लौटना उसका,
व्यर्थ भाव बिलखती अखियाँ,
बीते लम्हों को याद करके,
तन्हाई में सिसकती अखियाँ..
रात भर जगती अखियाँ,
राह उसकी तकती अखियाँ,
आंसुओं का बाँध है इनमें,
रो नहीं सकती अखियाँ।
मुमकिन नहीं अब लौटना उसका,
व्यर्थ भाव बिलखती अखियाँ,
बीते लम्हों को याद करके,
तन्हाई में सिसकती अखियाँ..
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