रिश्ते

रिश्ते 

Rupa Oos ki ek Boond

रिश्ते काँच सरीख़े हैं,
टूट कर बिखर ही जाते हैं.
समेटने की ज़हमत कौन करे,
लोग काँच ही नया ले आते हैं..💔💔

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